संपादकीय : उत्तराखंड में निकोटीन व तंबाकू युक्त  गुटका, पान मसाला की बिक्री पर प्रतिबंध क्या केवल चुनावी घोषणा ?

उत्तराखंड की धामी सरकार ने  एक और सराहनीय फैसला लिया है की अब उत्तराखंड में केवल  एक साल के लिए निकोटीन  एवं तंबाकू युक्त  गुटका, पान मसाला की बिक्री पूर्ण रूप से प्रतिबंधित मानी जायेगी, गौर तलब है की तंबाकू और तंबाकू रहित गुटका अलग अलग बिकने पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा   लेकिन क्या वाकई में इस फैसले से उत्तराखंड में पान मसाला और तंबाकू की बिक्री बंद हो जाएगी, जिन व्यापारियों  ने बड़ा स्टॉक इकट्ठा कर रखा है उनके स्टॉक का क्या होगा ?  क्या इस फैसले के बाद स्वाभाविक मानी जा रही पान मसाला और गुटका की काला बाजारी रोकने की कोई तैयारी भी की गयी है ?

उत्तराखंड में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है; जनहित और स्वास्थ्य सुरक्षा के चलते इससे पहले भी वर्ष 2013, 2015 और 2019 में ऐसे प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं, उस वक्त भी कुछ ही समय में जमाखोरी और कालाबाजारी के कारण यह प्रतिबंध निष्क्रिय हो गया था, और तंबाकू और गुटका अलग अलग पैकेटों में उपलब्ध होने लगे थे

याद रखिए इसी प्रकार का प्रतिबंध तो सिंगल यूज प्लास्टिक पर भी लगाया जा चुका है लेकिन आज भी प्रशासन और सरकार की नाक के नीचे धड़ल्ले से सिंगल यूज प्लास्टिक की बिक्री जारी है।

त्योहारों के आस पास खाना पूर्ति के लिए प्रशासन एक दो दुकानों पर छापे मार कर और जुर्माना डाल कर अपने कर्तव्य की इति श्री कर लेता है। क्या सिंगल यूज प्लास्टिक बिकनी बंद हो गयी है  ? प्रतिबंधित तो भीख मांगना भी था क्या वो बंद हो चुका है ? शहर के हर सड़क पर खुलेआम भीख मांगने वाले गिरोह संचालित हो रहे हैं, और प्रशासन के पास यह सूचना न हो यह संभव नहीं है। प्रतिबंधित तो कच्ची शराब बनाना और बेचना भी थी क्या वो भी बंद हो चुकी है ? प्रतिबंधित तो गांजा बेचना भी था क्या वो भी बिकना बंद करवा पाई है राज्य की पुलिस ? तो फिर क्या फायदा ऐसे आदेशों का जिसे भारी भरकम सरकारी ताम झाम, और प्रशासन  धरातल पे लागू नहीं कर पा रहा ?

इस आदेश के बाद पूर्ण आशंका है की प्रदेश के सभी तंबाकू व्यापारियों और सटॉकिस्टो से चालान के नाम पर अवैध उगाही शुरू हो जायेगी प्रतिबंधित उत्पाद अधिक दाम पर ब्लैक में मिलने लगेगा और फिर जब प्रतिबंध लगाना ही था तो केवल एक साल के लियें क्यों ? अगर प्रतिबंध लगाना ही है तो पूर्ण रूप से तंबाकूऔर निकोटीन की बिक्री पर लगाना चाहिए । लेकिन  केवल एक साल के लिए ऐसा प्रतिबंध जो केवल निकोटीन एवं तंबाकू युक्त गुटका, पान मसाला पर लगाया गया है न की तंबाकू, नीकोटीन और तंबाकू रहित गुटका के अलग अलग बेचे जाने पर।  कुल मिला कर ऐन चुनाव से पहले ऐसे आदेश आने का केवल राजनीतिक सुर्खी बटोरने की कवायद ज्यादा लगता है । मीडिया और भाजपा कार्यकर्ता एवं समर्थकों ने बिना आदेश की विवेचना करे ही माननीय मुख्यमंत्री जी की शान में कसीदे पढ़ने शुरू कर दिए हैं । खैर इस प्रतिबंध का हश्र भी सिंगगल यूज प्लास्टिक पर लगे प्रतिबंध की तरह न हो ऐसी ईश्वर से प्रार्थना है। जय श्री राम।

 

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