काशीपुर, उत्तराखंड राज्य के प्राचीनतम एवं पौराणिक शहरों मे से एक शहर जिसका उल्लेख प्राचीन शास्त्रों में मिल जाता है, काशीपुर शहर को जिला घोषित कराए जाने की दो दशक से भी पुरानी मांग को हर सरकार चाहे भाजपा की हो या कांग्रेस की, दोनों ने नजरंदाज किया है, कमाल ये है की विपक्ष एवं सत्ता पक्ष दोनों को यह मांग केवल चुनाव आने से पहले याद आती है । इसीलिए लगता है इस विधान सभा चुनाव से पूर्व एक बार फिर काशीपुर जिला बनाओ का मुद्दा उछाल जाएगा जिस पर दोनों दल अपनी चुनावी रोटियाँ सेकेंगे । किन्तु राज्य निर्माण के बाद से आज तक अगर हम देखें तो पाएंगे की कल तक जो शहर काशीपुर के आस पास भी नहीं थे, हास्यास्पद रूप से आज काशीपुर शहर भी उन शहरों के आस पास नहीं , चाहे आप हल्द्वानी की बात करें या रुद्रपुर शहर की या फिर सीमावर्ती कस्बे ठाकुरद्वारा की | 90 के दशक मे व्यापार एवं विकास के लिए काशीपुर की मिसाल दिया करते थे वहीं आज काशीपुर वाकई में एक कस्बा होकर रह गया है, जबकि शहर की जनता ने देश की दोनों प्रमुख दलों , कांग्रेस तथा भाजपा को बराबर मौका दिया फिर भी आज स्वास्थ्य सुविधा हों, सड़के, परिवहन या व्यापार किसी का ध्यान इस ओर है ही नहीं !
साथ ही ध्यान रहे सरकार कोई भी आई हो सभी का ध्यान केवल इस शहर से राजस्व इकट्ठा करने पर रहा है, इतना राजस्व राज्य को देने के बाद भी शहर की स्तिथि दयनीय है ,! लेकिन प्रश्न यह है की क्या इस स्तिथि के लिए हम काशीपुर के नागरिक भी बराबर के भागीदार हैं ?
विचार कीजिए तुलना कीजिए
हल्द्वानी की स्वास्थ्य सेवाओं और अपने शहर की
हल्द्वानी स्टेडियम और आपका स्टेडियम
रुद्रपुर, काठगोदाम और हल्द्वानी का निर्माणाधीन रोडवेज और आपका रोडवेज बस अड्डा