काशीपुर। ढेला नदी जिसे काशीपुर की जीवन रेखाकहा जाता था। सरकार, प्रशासन तथा नागरिकों के तिरस्कार के बाद अब उसी ढेला नदी को बायो वेस्ट के कूड़ेदान के रूप में प्रयोग किया जाने लगा है। ढेला नदी के आस पास लगातार नए प्राइवेट अस्पताल बनते जा रहे है, स्वास्थ्य विभाग की मिली भगत से इस अस्पतालों पर किसी भी प्रकार का कोई अंकुश नहीं है, इन अस्पतालों द्वारा गुप चुप रूप से अपने यहाँ के मेडिकल वेस्ट को ढेला नदी में डम्प किया जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग को इसकी भनक तक नहीं हो ऐसा भला कैसे संभव है ?
हुआ यूं की रविवार को गोरक्षा दल में कार्य करने वाले अभिषेक अपने साथियों के साथ एक मृत मवेशी को दफनाने के लिए ढेला पुल के नीचे नदी में पहुंचे। युवक ने फावड़े से गड्ढा खोदना शुरू किया तो रेत उठाते ही बड़ी मात्रा में बायोमेडिकल वेस्ट पड़ा मिला। इसमें प्रयोग की गई सीरिंज, इंजेक्शन की खाली शीशियां आदि बायोमेडिकल बेस्ट सामग्री थी। उनका कहना है कि यह बायोमेडिकल वेस्ट कब से पड़ा है किसी को नहीं मालूम। नदी के पास चरने आने वाले पशुओं के पैर में सिरिंज आदि चुभने से संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका है। ढेला पुल के आसपास बच्चे भी खेलते रहते हैं। लोगों का कहना है कि यहां बायोमेडिकल वेस्ट कौन फेंक रहा है, इस मामले की जांच होनी चाहिए। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाला और गैर जिम्मेदाराना बयान सी. एम. ओ . श्री के. के. अग्रवाल द्वारा दिया गया है उनका कहना है की काशीपुर में ढेला पुल के नीचे नदी किनारे बायोमेडिकल वेस्ट पड़ा होने की जानकारी नहीं है। हो सकता है किसी प्राइवेट अस्पताल ने फेंका हो। टीम भेजकर इसकी जांच कराई जाएगी।
तो क्या ये मान लिया जाए की किसी भी प्राइवेट अस्पताल के मेडिकल वेस्ट निस्तारण की नियमित जांच नहीं की जा रही है, आखिर यह जिम्मेदारी किसकी है ?
नीचे बड़ी मात्रा में पड़े बायोमेडिकल वेस्ट से संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका संभावना बनी है। जिम्मेदारों को इस बात की अभी तक भनक नहीं है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मामले की जांच कराने की बात कह रहे हैं। जनता और व्यवस्था भगवान भरोसे ।