कांग्रेस ने एक नया सांगठनिक तंत्र खड़ा किया है: ‘रचनात्मक कांग्रेस’! कल संभवत: इसका पहला बड़ा सम्मेलन था. उसमें ‘रचनात्मक कांग्रेस’ के प्रमुख संदीप दीक्षित जी ने अपनी एक ‘वाहियात टिप्पणी’ से अपने नवगठित संगठन और उसके सम्मेलन को विवादास्पद बना दिया!
कह सकते है, आज के दौर में राजनीतिक विमर्श के मोटे तौर पर ‘दो शिविर’ बन गये हैं. ऐसे में पत्रकारों के लिए मुश्किलें जरूर हैं. इसके बावजूद महत्वपूर्ण मुद्दों पर सच बोला जाना चाहिए, चाहे वे किसी को अच्छा लगे या बुरा! अगर ‘सत्ताधीशों’ के गलत फैसलों या उनकी गलत बातों की खुलकर आलोचना करते हैं तो विपक्ष के किसी नेता की वाहियात टिप्पणी पर खामोश क्यों रहें? कल ऐसा लगा मानो अपनी पार्टी की ‘फौरी कामयाबी’ से अति-उत्साहित राहुल गांधी और कांग्रेसी नेता संदीप दीक्षित जी विवेक और भाषायी संयम खो बैठे हैं! संदीप दीक्षित ने कल ‘रचनात्मक कांग्रेस’ के कार्यक्रम में जिस तरह अपनी पार्टी और नेता राहुल गांधी को फजीहत में डाला, वह जितना आश्चर्यजनक है, उतना ही अशोभनीय भी!
उन्हें निश्चय ही Italian PM Georgia Meloni से तत्काल माफी मांगनी चाहिए. ‘रचनात्मक कांग्रेस’ का ऐसा ‘बंटाधार’ फिर न हो, इसके लिए उन्हें पद से इस्तीफा भी दे देना चाहिए. दिवंगत शीला जी आज होतीं तो वह भी शायद यही सलाह उन्हें देतीं!
लेकिन फिलहाल तो लगता यही है कि जब तक राहुल गांधी हैं, तब तक भाजपा को कोई नहीं हरा पाएगा। राहुल गांधी बार बार अपनी राजनीतिक अपरिपक्वता और संवेदन हीनता का कोई न कोई सबूत भाजपा के लिए छोड़ देते हैं। एक बार फिर पूरी कांग्रेस को ऐसे मुद्दे पर राहुल गांधी का बचाव करना पड़ेगा जिसमें उन्हें नाको चने चबाने पड़ जायेंगे। भाजपा इस मुद्दे को इतनी आसानी से नहीं जाने देगी।