संपादकीय : काशीपुर कांग्रेस में एक कुर्सी तीन सचिव, क्या होगा परिणाम ?

काशीपुर, राज्य की प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा महत्वपूर्ण पदों पर सौंपे गए दायित्वों के क्रम में काशीपुर कांग्रेस में भी नवीन दायित्व धारियों की सूची जारी की जा चुकी है। हालांकि इस सूची ने एक प्रश्न चिन्ह जरूर खड़ा कर दिया है, की आखिर प्रदेश कमेटी को  काशीपुर जैसे शहर में प्रदेश सचिव के तीन- तीन पद बनाए जाने की क्या आवश्यकता पड़ गयी ? क्या तीन व्यक्तियों को एक समान दायित्व दे देना काशीपुर कांग्रेस मे वर्चस्व की लड़ाई को बड़ाएगा नहीं ? क्या तीनो सचिवो के अहं नहीं टकरायेंगे ,मंच पर फोटो, भाषणो मे पहले नाम, मंच पर कुर्सी पर हर सचिव अपना दबदबा नहीं चाहेगा । 
 गूढ प्रश्न यह है की क्या काशीपुर कांग्रेस मे सब सही चल रहा है? यह प्रश्न इसीलिए भी किया जाना चाहिए क्योंकि  “पूर्व मेयर प्रत्याशी श्री संदीप सहगल जिन्होंने हर चुनाव की तरह सबसे पहले मिशन 2027 में स्वयं को प्रत्याशी मानते हुए अपने  प्रचार प्रसार की तैयारी जोर शोर से शुरू कर दी है”, उनके  साथ ही  श्रीमति दीपिका गुड़िया आत्रे एवं पूर्व महानगर अध्यक्ष श्री मुशर्रफ हुसैन को भी श्री संदीप सहगल के समकक्ष ही प्रदेश सचिव का प्रभार दे दिया गया है । तो क्या यह समझ जाए की काशीपुर कांग्रेस कमेटी से चलते हुए मतभेदों और “एकला चलो रे” की नीति के कारण भी संदीप सहगल को कभी उनके द्वारा प्रस्तावित या दूसरे शब्दों में कहें  परोक्ष रूप से बनाए गए महानगर अध्यक्ष मुशर्रफ हुसैन , के समकक्ष ला कर खड़ा कर दिया गया है। इसके विपरीत संदीप सहगल के विधायक टिकट के सबसे मजबूत प्रतिद्वंदी समझे जा रहे अनुपम शर्मा को पार्टी ने तरजीह देते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष एवं अनुशासन कमेटी मे जगह दी है ।

नगर निगम मेयर चुनाव में अपने विवादास्पद बयान से पार्टी के लिए असहज स्तिथि उत्पन्न करने वाले श्री  मुशर्रफ हुसैन ने निगम चुनाव के तुरंत बाद संदीप सहगल के विरुद्ध बागी तेवर अपनाते हुए महानगर अध्यक्ष पद के लिए पार्टी की वरिष्ठ महिला कार्यकर्ता श्रीमति अलका पाल के निर्वाचन को पूर्ण समर्थन दिया था ,जबकि श्रीमति अलका पाल के निर्वाचन का खुल कर विरोध संदीप सहगल  दर किया गया तथा श्रीमति अलका पाल के विरुद्ध पार्टी के एक खेमे को खड़ा कर दिया गया था, इस सबके बावजूद श्रीमति अलका पाल महानगर अध्यक्ष बन गयी, जिसके  बाद से ही काशीपुर कांग्रेस कमेटी में संदीप सहगल अलग थलग दिखाई दे रहें हैं। यहाँ तक की मिशन 2027 की तैयारी में भी काशीपुर कांग्रेस का कोई बड़ा पदाधिकारी उनके साथ नजर नहीं आता , जबकि श्री अनुपम शर्मा के साथ वर्तमान महानगर कांग्रेस कमेटी खड़ी दिखाई देती है। ध्यान रखने वाली बात यह है की काशीपुर में कांग्रेस के लगातार हारने की सबसे बड़ी वजह कांग्रेस की अंतर्कलह ही रही है।  ऐसे में पदों की बंदरबाँट से  काशीपुर कांग्रेस के आंतरिक मतभेदों का गहरा होने की पूर्ण संभावना है और जिसका असर निश्चित ही आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन पर पड़ना निश्चित है। 

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