कल झारखंड के मुख्यमंत्री ने टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा कर दी है। आखिरकार झारखंड सरकार धरने पर बैठे छात्रों की मांगों के आगे झुक गई है। खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने टीडीपीएल की ओर से आयोजित की गई सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा कर दी है। हालांकि अब उन 1200 लोगों की नौकरी पर बन आई है जो इन परीक्षाओं को पास कर कोर्ट के आदेश के बाद नौकरी पर लगे थे।वहीं, झारखंड के जेन जी का यह आंदोलन एक मिसाल बन गया है। जहां छात्रों ने बिना किसी राजनीतिक पार्टी के साथमंच साझा किये, सरकार और उसके कारिंदों को गाली दिये बिना आखिरकार यह लड़ाई जीत ली। यहां किसी ने बिरयानी नहीं बांटी, किसी ने विदेशों से फास्ट फूड के ऑर्डर आंदोलन स्थल पर नहीं भिजवाये।
जबकि दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के द्वारा आयोजित आंदोलन में आये जेन जी ने मर्यादा की हद लांघ कर प्रधानमंत्री मोदी और उनकी मां को बहुत गंदी-गंदी गालियां दीं गई, सनातन विरोधी नारे लगाये गए, उमर खालिद जैसे देशद्रोहियों के समर्थन में नारेबाजी भी की गई, वहां पर कोई विदेशों में बैठे लोग ऑनलाइन ऑर्डर कर फास्ट फूड के ऑर्डर आंदोलन स्थल पर भिजवा रहे थे। सभी विपक्षी दलों के नेताओं में जंतर मंतर पर हो रहे आंदोलन में पहुंचने की होड लगी हुई थी। एक तरह से जंतर मंतर का आंदोलन छात्र आंदोलन न होकर सरकार विरोधी आंदोलन बन कर रह गया था।
मांग दोनों जगह आंदोलन कर रहे छात्रों की मानी गई। दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने इस्तीफा दिया तो झारखंड में सरकार ने परीक्षायें रद्द कर दीं। बस एक आंदोलन की हमेशा आलोचना होगी तो दूसरे आंदोलन की हमेशा मिसाल दी जाएगी। झारखंड के युवाओं ने देश के सच्चे नागरिक और युवा शक्ति की आदर्श छवि इस देश के सामने प्रस्तुत करी है।